Ek ladki Jo kabhi nahi haari by Vilma rudolfa in Hindi book Summary
यह कहानी है उस लड़की की जिसे ढाई साल की उम्र में पोलियो हुआ, जो 11 साल की उम्र तक बिना ब्रेस के चल नहीं पाई पर जिसने 21 साल की उम्र में 1960 के ओलम्पिक में दौड़ में 3 गोल्ड मैडल जीतेच में विल्मा कोई आम लड़की नहीं थी. किस्मत ने उसेआजमाने के लिए उसके सामने एक नहीं बल्किअनगिनत मुश्किल हालात खड़े किये थे. टेनेसी में रहनेवाले एक गरीब परिवार की बेटी थी विल्मा रुडोल्फ. महज़ चार साल की थी वो जब न्यूमोनिया और स्कारलेटबुखार का दोहरा हमला हुआ था उस नन्ही सी जान पर. ये सितम उस पर ऐसा टूटा की छोटी सी विल्मा इसबिमारी से PARALYSED होकर हमेशा के लिए पोलियोका शिकार हो गयी थी. एक अपाहिज का जीवन जीनेको मज़बूर. उसे हमेशा के लिए WHEELCHAIR कासहारा लेना था और उसके डॉक्टर का कहना था की वोकभी भी अब दुबारा ज़मीन पर पैर नहीं रख पाएगी |
मगर विल्मा की माँ ने उसका हौंसला नहीं टूटने दिया. वोएक मज़बूत चट्टान की तरह उसके साथ खडी थी. अपनी औलाद को हर हाल में जो टूटने ना दे शायद यहीएक माँ की सबसे बड़ी खासियत होती है. विल्मा की माँने भी सोच लिया था की वो बेटी को किसी भी सूरत मेंहार मानने नहीं देगी |
बड़े मज़बूत लहज़े में उसकी माँ ने कहा. “मेरी बच्चीअगर उस खुदा में तुम्हारा यकीन एकदम पुख्ता हैउसकी दी हुई काबिलियत और अपनी इस लगन से तुमजो चाहे वो कर सकती हो”
“मै इस धरती की सबसे तेज़ दौड़ने वाली लड़की बननाचाहती हु” विल्मा ने अपना फैसला सुनाया.
और फिर नौ साल की उम्र में डॉक्टरों की चेतावनी केबावजूद विल्मा ने अपने ब्रेस उतार फेंके और ज़मीन परअपना पहला कदम रखा. अपने तेरहवे साल में विल्मा नेअपने जीवन की पहली रेस में हिस्सा लिया. ये अलगबात थी की इस रेस में वो बहुत पीछे रह गयी थी. मगरये सिलसिला यही नहीं रुका विल्मा ने ज़िंदगी से कोई भीसमझौता ना करने का फैसला कर लिया था. पहली रेसहारने के बाद उसने अपनी दूसरी तीसरी और चौथी रेसभी हारी और वो तब तक कोशिश करती गयी जब तककी जीत की कामयाबी ने उसके कदम नहीं चूम लिए. पहली बार जीती गयी उस रेस ने उसके हौसलों को औरभी बुलंद कर दिया था.
“मै इस धरती की सबसे तेज़ दौड़ने वाली लड़की बननाचाहती हु” ये शब्द विल्मा ने अपने कोच एड टेम्पल को धौराये जिनसे वो टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी में मिली थी.”. सिर्फ पंद्रह साल की उस लड़की में गज़ब का ज़ज़्बा थाकोच एड टेम्पल उससे प्रभावित हुए बिना न रह सके. जिस उम्र में बाकी लड़किया सहेलियों के साथ खेल कूदकरती है सपनो की ख्याली दुनिया में उड़ा करती है उसीकच्ची उम्र में विल्मा के अंदर कुछ कर गुजरने का जुनूनपूरे उफान पर था.
वो समझ गए थे की इस लड़की के अंदर एक धधकडतीहुई आग है जो एक सही दिशा का इंतज़ार कर रही है. “मेरा यकीन मानो जिस लगन के साथ तुम इस बारे मेंसोच रही हो न दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हे ऐसाकरने से नहीं रोक सकती और इस सपने को पूरा करनेमें मै तुम्हारा साथ दूंगा. एड टेम्पल जानते थे विल्माअपने जैसे लोगो के लिए एक मिसाल बन सकती थी. और जल्दी ही वो दिन भी आया जब विल्मा काओलंपिक्स में जाने का सपना पूरा हुआ. ओलंपिक्सजहाँ सिर्फ और सिर्फ बेहतरीन चुने हुए खिलाड़ियों कोही मौका मिलता है अपनी काबिलियत दिखाने का.
वहां विल्मा का मुकाबला ऐसी ही एक बेहतरीन खिलाडीके साथ होना था जिसका नाम था जुटा हीन जिसेआजतक कभी शिकस्त हासिल नहीं हुई थी. इस इवेंटकी पहली रेस एक 100 मीटर की दौड़ थी. विल्मा नेइस दौड़ में जुटा को हराकर गोल्ड मैडल जीता.
दूसरी दौड़ 200 मीटर कि थी. एक बार फिर जुटा सेविल्मा का सामना था. बड़े ही हैरतअंगेज तरीके सेविल्मा ने जुटा को हराकर ये रेस भी जीत ली थी उसनेदूसरी बार एक और गोल्ड मैडल हासिल किया. तीसराइवेंट 400 मीटर का एक रिले रेस थी. यहाँ एक और बारविल्मा और जुटा एक दूसरे के आमने सामने थी औरजीत के लिए दोनों जीजान से तैयार थी. इस रिले मेंसबसे तेज़ दौड़ने वाला खिलाडी लास्ट लैप में भागता है. विल्मा और जुटा दोनों ही अपनी अपनी टीम को एंकरकर रही थी. पहले तीन खिलाडी दौड़े और बैटन कोआसानी से एक दूसरे के हाथो में सौंप दिया मगर जबविल्मा की बरी आयी तो बैटन उसके हाथो से छूट गया.मगर विल्मा तब तक जुटा को दूसरी तरफ से तेज़ी सेआते हुए देख चुकी थी. किसी मशीन की तेज़ी से विल्माने फुर्ती से बैटन को उठा लिया और दौड़ने के लिएअपनी पूरी ताकत लगा दी. बस फिर क्या था किस्मतको भी विल्मा की ज़िद के आगे घुटने टेकने पड़े. येतीसरी बार था जब जुटा को हराकर विल्मा रेस जीतचुकी थी. तीन गोल्ड मैडल एक साथ जीतकर उसने एकनया इतिहास रचा था.
1960 के ओलंपिक्स में विल्मा एक परलैटिक औरतदुनिया की सबसे तेज़ दौड़ने वाली खिलाडी बानी. येएक नया कीर्तिमान था.
तो दोस्तों हमें इस सच्ची कहानी से क्या सीख मिलती है?
क्या फर्क है एक विनर और loser मे?
...
सिर्फ सोच का.
जो इंसान कभी भी हार नहीं मानता उसके सामनेकिस्मत भी घुटने टेक देती है|
इसीलिए जब भी आपको लगे की आपके सामनेकठनाईयो का पहाड़ है | आपकी किस्मत आपका साथनहीं दे रही | बस विल्मा की इस कहानी को याद करलीजियेगा |
और आप भी सारी मुश्किलों को आसानी से पार करलेंगे |
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